क्यूँ सुनती हूँ ? क्यूँ चलना चाहती हूँ,? तुम्हारे अनुसार? क्यूँ सुनती हूँ ? क्यूँ चलना चाहती हूँ,? तुम्हारे अनुसार?
तुमसे मेरी हर अभिलाषा तुमसे मेरी हर अभिलाषा
तुम्हारे होंठ तुम्हारे होंठ
बस हर बदलाव को पाने को एक नया सहारा खोजना चाहता है बस हर बदलाव को पाने को एक नया सहारा खोजना चाहता है
वानप्रस्थ और संन्यास। वानप्रस्थ और संन्यास।
आज हमारा बचपन है कल हमारा यौवन है फिर हमारा बुढ़ापा है आज हमारा बचपन है कल हमारा यौवन है फिर हमारा बुढ़ापा है